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घूमते रहे

चित्र
सुख की कतरने चूमते रहे
जाम-ए-गफलत पी लिया, झूमते रहे
हर गली, हर सड़क बावस्ता अंगूठे के
फिर भी किस चाह में घूमते रहे!!