पंजाब पुलिस अकादमी



ये दीवार-ओ-दर-याद आएंगें,
ये जमीं ये शजर याद आएंगें।

वो तरतीब औ तालीम औ तहजीब जो सीखी
हर्फ बा हर्फ शाम-ओ-सहर याद आएंगें।

इश्क करना था सुना इंसा का शगल है,
प्यार में झूमते ये जानवर याद आएगें।

मुस्तफा औ रकीब औ सरपरस्त,
भूल जाएं भी मगर याद आएंगें।

कुछ पलों का साथ देकर जो चले,
उम्र भर वो रहगुजर याद आयेंगें !!

टिप्पणियाँ

  1. कुछ पलों का साथ देकर जो चले,
    उम्र भर वो रहगुजर याद आयेंगें !!
    bahut achche... really

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  2. बहुत अच्छा अधिकार है आपका. ग़ज़ल अच्छी लगी, खासकर ये शेर -
    इश्क करना था सुना इंसा का शगल है,
    प्यार में झूमते ये जानवर याद आएगें।

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  3. बेहतरीन। बधाई।
    समेट लो इन नाजुक पलों को
    न जाने ये लम्हें कल हो ना हो।

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  4. ग़ज़ल के शेर और पुलिस का दिल क़यामत का मेल है
    छोटे भाई के एक बैचमेट अनायास याद आ गए हैं, यशवंत. राज्य पुलिस सेवा के प्रशिक्षण के दौरान इसी तरह उर्दू के अदब से परेड ग्राउंड को मीठा बनाये रखते थे. अब पता नहीं दस साल तक पुलिसिया कार्यों के कारण कैसे होंगे. आपके इन खूबसूरत शेर के साथ कल फोन करता हूँ.

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  5. देखा किए इक जल्लाद हर वर्दी वाले में
    अब तो ये हर्फ-ए-दिलावर याद आएँगे।

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  6. हाँ बस ऐसे ही अल्फाज़ ..दिल को छू जाते हैं ।

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