मेरी प्रेम कविता

मै
....फटे अखबारों की तरह उड़ता रहा
यहाँ वहां
तुम
...मखमली फाहों के मानिंद
मुझे सहेजती रही !!

टिप्पणियाँ

  1. इस कविता को भी लम्बे अरसे के लिए सहेजा जाएगा.
    कुछ और हो जाय इसी श्रृंखला में.

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  2. तेरा हर लफ्ज़ एक कशिश
    सा जगाता हैं इस दिल में..
    इसीलिए तो शामिल हैं हम
    तेरे दीवानों की महफिल में...

    बेहतेरीन......
    ये ताज़ी रचना है?? या पहले की...............??
    पर सहेजने वाले के काबलियत की भी दाद देनी पड़ेगी ... :-)

    उत्तर देंहटाएं

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